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एक कुत्ता मेरे सामने से आ रहा था वडवडाता हुआ कराहता हुआ , मेरी तरफ देख रहा था निर्वल मन से टुरते हुये दिल ही दिल मे ना जाने कितनी गालियाँ दे गया , आंखो के कान्टेक्ट से उसके साथ गुजरी व्यथा को एक्सपलेन कर रहा था मानो वोल रहा हो अंकुश, देख तेरी विरादरी के लोगों ने मेरा ये कया हाल किया , आखिर कया कसुर था मेरा यही कि मुझे किसी रईस मालिक ने नही पाला , खुन्डी से नहीं वान्धा कया यही ? , तुमसे मैने कुछ मांगा कया ? जो तुमने मेरा यह हाल किया , आराम से विना तुम्हे तंग किये सडक के किना रे ही तो सो रहा था , वस यह भुल गया था कि तुम्हारी विरादरी भी साथ ही वसती है लेकिन सच वताउ अव मै कुछ नही कर सकता पैरो से जो तुमने लाचार वना दिया , तुम्हारे द्वारा वोलने वाली ये लिटील मिस्टेक शायद मुझे कितनी वडी सजा दे गयी , तुम नही समझ सकते , नही समझ सकते दोस्त कभी नही , , , , , , हम्म्म चुप कयों हो , कुछ वोलोगे नी , कयों ईसलिये कि मै एक आवारा कुत्ता था अगर तोड दी टांग तो कया हुआ गली का कुत्ता ही तो था , अरे कुत्ता हु तो कया जान नही मुझमे जानते हो कितनी दर्द हो रही , कराह रहा हु मै , तुम्हारी तरह...
विश्व पर्यावरण  दिवस 5 जुन या यु कहें world environment day ये दिन वास्तव मे सवसे ज्यादा वच्चों के द्वारा ज्यादा  मनाया जाता है खुव स्लोगन लिखे जाते हैं भाषण प्रतियोगिता होती है लोगों को जागरुक किया जाता है कि सुनो पर्यावरण की पुकार , ना चलाओ ईनके उपर अपने झुठे विकास की धार , लेकिन हम मानव जाती एसी है  की सोचती नहीं , प्रयावरण एक उपहार है जो प्रकृति  ने हमे दिया है लेकिन हम कितना सजों पाये हैं  ईसे ? ये जव प्रशन उठता है तो सवालों का सैलाव उठ जाता है .सामने वडी वडी विल्डींग टैं टैं करती तेज कारें उन्चे उन्चे कारखाने और उनसे निकलता धुआं वा प्रदुषित जल, जो मिला दिया जाता है नदीयों मे नालों मे सवसे पहले ये समझना होगा प्रदुषण है कया.? साफ शव्दों मे किसी भी प्रकृति की क्रिया को दुषित करना या नुकसान पहुचाना फिर वो जल प्रदुषण हो जो कारखानों से और मानविय गतिविधियों से हो रहा हो या ु प्रदुषण जो हम जैसे लाडलों की टी टी करके वाहनों को भगाने से हो या भुमि प्रदुषण मे मानव ने कुछ समय ये हद ही कर रखी है पालीथीन जी हां प्लास्टिक को अपनी रोजमर्रा  मे एसा शामिल कीया है कि...
वालिवुड की क्वीन ankushThakur कुछ दिनो से जव से तन्नु वैडस मन्नु रिलीज़ हुयी सोशल मीडिया मे हर जगह तन्नु उर्फ कंगना ही कंगना छायी है कुछ हास्य वयंग तरिकों से रिशते मे तो हम तुम्हारे वाप लगते हैं नाम है कंगना कहके तो कुछ अपने अपने तरिकों से कंगना की एक्टिंग को एपरिसीएट कर रहे हैं ,  करनी भी चाहिये , पहली वार रात को 12वजे भी थियेटर फुल देखा और एक पहाडी लङकी ने जो हरियाणवी वोली है रुको रुको मै अपने आप को रोक नही पा रहा हुं , हां तो मै कहना चाहता हुं की जो फाडु हरियाणवी ईस पहाडी मठी ने वोली  है वो सवके जहन और दिमाग मे घुम रही है , फिल्म मे जो सिर्फ खान परिवार या खान नाम से अपने आपको अपनी नईया पार लगाने की जद्दोजहद मे रहते उनको भी कंगना प्यार से तमाचा मार कर चली गयी, और वहुत आगे , वहुत करिटीसीजम झेल कर भी यह लडकी अपने काम मे लगी रही और वालिवुड की क्वीन का खिताव कईयों को पिछाडते अपने नाम किया , कहते है जव कोई अपनी कमजोरी को अपनी ताकत वना लेता है तो वही कमजोरी उसकी सफलता का कारण वनती है ,साक्ष्य सामने है सोनाक्षी की हर जगह मोटापे के कारण वुरायी की लेकिन वन्दी ने कीसी की...
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                          "YAADE" A " HIMACHAL" तो जी वात है उन दिनो की जव हम छोटे से क्युट से वच्चे हुआ करते थे, स्कुलिंग मे थे तो वरसात की दो महीने की छुट्टियां ही हमारे लिये सर्वोच्च त्योहार हुआ करती थीं  तो वस जिस दिन छुट्टियां पडी अगले ही दिन सव होमवर्क चेप दिया शुरुआत साईंस से की और मैथ्स पर जाके स्वाहा कर दी हाहा हा वाद मे मुर्गा वना कर पिटा था मुझे मास्टर जी ने , वडा दर्द हुआ पर सारा दर्द हंसी मे तवदील हो गया जव साथ वालों की उससे भी खतरनाक अवाजें सुनी हा हा उस हंसी की चक्कर मे दो डन्डे फालतु खा लिये थे पर फिर भी वे शरम की तरह हंसी रुकी नहीं , खैर थोडा फार्वड मोड मे चला गया , हा तो छुट्टियां खत्म हुई और मासी के यहां हमारा कारवां वड लिया जाहु के साथ मे जगह वहां पहुंचे शुरुआत मे थोडे शांत से वैठे वाद मे ले दगडम ले वगडम हल्लम हल्ला , तो मासी हमारी सावन के भोले वाला के व्रत किया करती थी साथ मे नजदिक कुआं था तकरीपन 52 पौडी का वडा आगे से नैरो पिछे काफी चौडा था तो मासी वोली आंकु तैरना औन्दा , मै वडा गाजला कन्नै ज्य...
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मजदूर दिवस भारत में वैसे वहुत से दिवस का ट्रैन्ड हो गया है जिसमे प्रेम दिवस और प्रेम के साथ साथ प्रेम के वाद आने वाले सारे दिवस होते है सवको प्रसन्नता से मनाया जाता है आज मजदुर दिवस पर कोई अपनी मजदुरी मार कर ईसे मनाना पसन्द नहीं करेगा जाहिर है पेट का सवाल है और पेट से समझौता कर भी ले मगर घर वार वच्चों के जव वलैन्कड वहाईट तस्विरे ंसामने आती और कान मे गुंज सुनायी देती अजि सुनते हो चावल भी खतम हो गये ? है तो यकिन मानीये धक धक करने वाला ये नैचुरल यन्त्र जिसको डाक्टर लोग हार्ट कहते हैं वोल उठता है भाई उठा अपना झोला और शुरु कर रोजी । लेकिन दुसरी ओर टेडा सा मुंह करके सोच रहा हुं सही भी किया सभी डिपार्टमैन्ट के दिन रख दिये तो ये भला ईसे कयों छोड दिया जाये आखिर हम सव भी तो मजदुर और मजवुर ही तो हैं ।कयी ए सी मे वैठने वाले मजवुर तो कयी कडकती धुप मे मेहनत करने वाले मजदुर ।आज हम उस एन्ड्राइड दौर मे जी रहे हैं जिसमे सभि व्हाईट कालर वाली नौकरी करना तो पसंद करते है पर पसीना वहाना कतयी नहीं चाहते ं । यदपि हम भारतीय परम्परा मे विशवक्रमा डे मनाते हैं जिस दिन सभी अपने हथियार डाल द...
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सटे्टस लिखने से पहले कुछ समझ नी आ रहा था शुरु कैसे करु पर कैसे भी अंगुठों को थोडा विश्वास देकर शुरु कर दिया है एक कडवा सच सांझा कर रहा हुं शायद कुछ लोग ईससे सहमत होंगे तो कुछ नहीं भी पर किसी संगीतकार ने सही कहा कि सच छुपता नहीं छुपाने से कुछ एसी वात है  हिमाचल एक ओर जहां देव भुमि सा पवित्र है वहीं आजकल नशे का अड्डा भी वना हुआ है पुरे उत्तर भारत मे जहां पंजाव ,शराव ,भुकी के लिये जाना जा रहा वहिं हिमाचल जवाईट चरस वा गांजा जैसे सुखे खतरनाक नशो के लिये जाना जा रहा  शायद अव  kuch  वुद्धिजीवी मेरी ईस वात को काटने से नहीं चुकेंगे कि हिमाचली अभी नहीं पहले बी ईस प्रकार के नशे के लिये मशहुर थे तो वावा पहले का तो मुझे पता नही पर जव से होश सम्भाला है अभि ज्यादा दिख रहे हर 5वां नौजवान ईन नशो का आदी हो रहा है आज एक उत्तराखण्ड का ळडका जो वीएमसी पास है उनकी माता राजनीति मे भी सक्रिय तो पिता वलौक आफिसर और जनाव ने अपनी सच्चाई खोली तो मै भी हैरान रह गया कि वराउन सुगर चरस गांजा से लेकर हर नशा उस शख्स ने कर रखा और अव परेशान है छोडना भी चाहता वडे दिनो से देख रहा था सायको सा लगता था...
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हुआ युं कि आज हम थोडे वहके हुये हैं वहुत से शव्द दिमाग में परिक्रमा कर रहे थे और हम भी कन्फुजिया गये थे कि किसे पकड कर आपके हवाले करें पर जैसे कि हमारा नेचर है हम राजनितीक मुद्दों को वहुत कम वार हाथ से फिसलने देते है मोस्टली हम उनमे सैटींग विठा के आपके सामने धर ही देते हैं आज अरसे के वाद मन भी किया लिखने का नहीं तो थोडा वहुत लिख देते थे चलते चलते लोकल की टकाटक लाईफ में तो कभी चारदिवारी में पर आप सव ही प्रेरित करते हो लिखने को कभि कुछ दोस्त मक्खन मार मार कर पुरा पिलपिला पंज ावी परांठा वना देते पर हम भी कुनाह खड्डों को वरसात में पार करने वाले पहाड़ी हैं एसे खुश नहीं होते हां हल्की सी ईस्माईल मार कर कल्टी जरुर मार लेते कहीं एसे भी मनुभाव हैं जो मेरे स्टेट्स का एसा निम्वु सिकन्जी वनाते की स्टेट्स भी रो क वोलता वस करो यार लिख कोई और रहा और पोस्टमारटम हमारा कर रहे ।खैर शव्दों की ईस जद्दोजहदत मे हम ये भुल गये कि लिखना कया था । सिरयसली हम आपका व्रेन वास करने नहीं आये हम वस आपको ये एहसास दिलाने आये थे कि हम अभि जिन्दा हैं फेसवुक पर और हमे भुलियेगा मत । और कोशिश ...