ankushthakur045.blogspot.com टाईप करने के लिये कोशीश तो कर रहा हु लेकिन वहुत कम शव्द आ रहे है , अवाक सा हु कुछ लिखने पढने का मन नही , सुवहा से ही वेकार शुरुआत हुयी जो शाम तक चली और फिर एसा लगा कि एक चिराग जिससे कई होते थे रोशन वो रोशनी देता देता अचानक वुझ सा गया मुझ जैसे कई ये आस मे अव भी वैठे है कि कोई हवा का एक एसा झोंका आ जाये जो ईस दीवक को फिर से जला दे ,चाहे कम रोशनी हो पर वस जल उठे आज एक महान ईसान हमारे विच से चला गया , यु ही मुस्कराता हुआ , हमारी आखों को नम करते हुए , और मुस्कान जरा भी फिकी नही पड ी , वीमार होने के वावजूद भी हमेशा वच्चों का मार्गदर्शन करना उन्हे सिखाते रहना पढाते रहना वाकई यह कोई आम मानव नही था एक वहुत वडा वैज्ञानिक एक राष्ट्र का राष्ट्रपति पर कभी राष्ट्रपति दिखा ही नही वस एक साधारण सा मनुष्य जो हंसता हंसता वहुत कुछ दे गया ईस विश्व को , सपने वो नही होते जो आप नींद मे देखते हो सपने वो होते जो आपको नींद नही आने देते वाकई कलाम साहव आपके शव्द वहुत भावात्मक कर रहे हैं , वो आपकी हल्की सी मुस्कराहट , जरा फिर से हंस दो ना प्लीज वस थोडा सा ,,, भारत रत्न श्री कलाम ज...
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"YAADE" A " HIMACHAL" तो जी वात है उन दिनो की जव हम छोटे से क्युट से वच्चे हुआ करते थे, स्कुलिंग मे थे तो वरसात की दो महीने की छुट्टियां ही हमारे लिये सर्वोच्च त्योहार हुआ करती थीं तो वस जिस दिन छुट्टियां पडी अगले ही दिन सव होमवर्क चेप दिया शुरुआत साईंस से की और मैथ्स पर जाके स्वाहा कर दी हाहा हा वाद मे मुर्गा वना कर पिटा था मुझे मास्टर जी ने , वडा दर्द हुआ पर सारा दर्द हंसी मे तवदील हो गया जव साथ वालों की उससे भी खतरनाक अवाजें सुनी हा हा उस हंसी की चक्कर मे दो डन्डे फालतु खा लिये थे पर फिर भी वे शरम की तरह हंसी रुकी नहीं , खैर थोडा फार्वड मोड मे चला गया , हा तो छुट्टियां खत्म हुई और मासी के यहां हमारा कारवां वड लिया जाहु के साथ मे जगह वहां पहुंचे शुरुआत मे थोडे शांत से वैठे वाद मे ले दगडम ले वगडम हल्लम हल्ला , तो मासी हमारी सावन के भोले वाला के व्रत किया करती थी साथ मे नजदिक कुआं था तकरीपन 52 पौडी का वडा आगे से नैरो पिछे काफी चौडा था तो मासी वोली आंकु तैरना औन्दा , मै वडा गाजला कन्नै ज्य...
Ankush Thakur December 20 · Edited · हर हर महादेव " वाजीराव मस्तानी " एक एतिहासिक किरदार , एक एतिहासिक कहानी, एक प्रेम कहानी एक परमवीर योद्धा की कहानी , जिसे कि संजय लीला भंसाली ने वडी ही सुन्दरता से सिनेमा तक पहुंचाया है , शायद पहले वाजीराव मस्तानी की कहानी या तो मराठा समाज तक सीमित थी या तो वडे वडे ईतीहासकारो के ज्ञान मे थी लेकिन सिनेमा तक पहुचने से एक वीर की कहानी एक वेईन्तहा महोव्वत करने वालो की कहानी जो कि धर्म जात समाज के व न्धन से परे कि है सवके सामने मानो जीवित सी हो जाती है , वाजीराव ने मस्तानी से महोव्वत की है अय्यासी नही कुछ ईस तरह के वेहद प्रभावशाली डायलौग फिल्म मे अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहते हैं । फिल्म हर हर महादेव के जयकारो और भगवा ध्वज से शुरु होती है और हर हर महादेव के जयकारो में गुंजती रहती है , मराठा युग के शौर्य और मुगलो को लोहे के चने चवाने पर मजवुर कर देने वाले महान योद्धा वाजीराव अपने परिवार से हार जाता है , आपको वता दे ईतिहास के अनुसार 40 से ज्यादा लडाईयां वाजीराव ने लडी थी जिसमे एक भी नही हारी आज भी (कोक...
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