विश्व पर्यावरण  दिवस 5 जुन या यु कहें world environment day ये दिन वास्तव मे सवसे ज्यादा वच्चों के द्वारा ज्यादा  मनाया जाता है खुव स्लोगन लिखे जाते हैं भाषण प्रतियोगिता होती है लोगों को जागरुक किया जाता है कि सुनो पर्यावरण की पुकार , ना चलाओ ईनके उपर अपने झुठे विकास की धार , लेकिन हम मानव जाती एसी है  की सोचती नहीं ,
प्रयावरण एक उपहार है जो प्रकृति  ने हमे दिया है लेकिन हम कितना सजों पाये हैं  ईसे ? ये जव प्रशन उठता है तो सवालों का सैलाव उठ जाता है .सामने वडी वडी विल्डींग टैं टैं करती तेज कारें उन्चे उन्चे कारखाने और उनसे निकलता धुआं वा प्रदुषित जल, जो मिला दिया जाता है नदीयों मे नालों मे
सवसे पहले ये समझना होगा प्रदुषण है कया.? साफ शव्दों मे किसी भी प्रकृति की क्रिया को दुषित करना या नुकसान पहुचाना फिर वो जल प्रदुषण हो जो कारखानों से और मानविय गतिविधियों से हो रहा हो या ु प्रदुषण जो हम जैसे लाडलों की टी टी करके वाहनों को भगाने से
हो या भुमि प्रदुषण मे मानव ने कुछ समय ये हद ही कर रखी है पालीथीन जी हां प्लास्टिक को अपनी रोजमर्रा  मे एसा शामिल कीया है कि खाने पहनने नहाने से लेकर हर चीजों मे प्लास्टिक छाया है और यह भुमि प्रदुषण का सवसे वडा कारण है ये तो सभि जानते की प्लास्टिक गलता नहीं है ज्यों का त्यों ही रहता है मै शुक्रगुजार  हु हिमाचल सरकार का जिन्होंने प्लास्टिक  पर पुर्ण प्रतिवन्ध लगाया है भले ही सरकार सत प्रतिशत  सफल ना हुयी हो पर फिर भी पुरे भारत को से सनदेश जरुर गया कि एक पहाडी राज्य ने सोचा और लागु किया लोगों ने भी अनुसरण किया तो वहुत अच्छी पहल है ये एक कदम है प्रदुषण को कम करने का,प्रदूषण का अर्थ है -प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना! न शुद्ध वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना !
दरअसल ये प्रदुषण नामक राक्षस विज्ञान की ही देन है ।जहां विज्ञान के वहुत सारे लाभ हैं वही अभिशाप  भी है मानव ने अपने सुख सुविधाओं  के लिये वो हर चिज तलासी जिसमे वो सकुन की जिन्दगी जी सके फिर सुख और विकास की होड मे वो ये भुल गया कि प्रकृति है तव वो है, विना प्रकृति  वो कुछ नहीं । और ये सव प्रकृति  भी दिखाती रहती है, जव अपना रौद्र रुप दिखाती हैै सुनामी भुकम्प मौसम वेमौसम वारिष और केदारनाथ मे जो हुआ वो तो सवके समक्ष ही है ईस्के पिछे भी पहाडों मे पेडों की अन्धाधुन्ध  कटायी, वान्ध, पहाडों को कोरा जा रहा तो प्रकृति  भी तो ईन्सान को उसकी औकात दिखायेगी ही प्रकृति भी चेतावनी दे रही कि हे ईन्सान मेहमान वनकर आया है मेहमान वन कर ही रह
आप को वता दें की लगातार पृथ्वी का तापमान  वड रहा है जो कि आने वाले समय के लिये खतरे की घन्टी से कम नहीं, पिछले पचास  सालो से पृथ्बी का तापमान ०.८ से लेकर एक डिग्री तक बड़ रहा है अगर इसे रोका नहीं गया तो हर बर्ष ये दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता रहेगा .
मैनेजमेंट:-
जल प्रदुषण को वहुत सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है सरकार और उद्योगपती दोनो मिलकर पर्यावरण के लिये थोडा सा सोचें ज्यादा नहीं वोल रहा हुं वस थोडा सा । जो भी कारखाने है उनमे जो दुषित जल है उसको अच्छी तरह ट्रीट करके ही छोडा जाये वकायदा पी पी एम का ख्याल रखा जाये कम से कम 15PPM से निचे दुषित जल को ना छोडा जाये कयोंकि ईस दुषित जल से ना सिर्फ  मानव जिवन मे समस्याएं उत्पन्न होती है अपितु जलीय जीव भी खत्म हो जाते हैं । कितनी शर्म की वात है ना अपने छोटे से सुख के लिये कितनों को कष्ट दे रहे और किसी ना किसी रुप मे खुद ही कष्टों को न्यौता दे रहे हैं
वायु प्रदुषण  मे सवसे पहली चिज जो हम समझनी चाहिये ,गाडियों का अनचाहा वेमतलवी ईस्तेमाल ना करो अव चाय पत्ती लेने भी पास की दुकान मे आप गाडी से जा रहे हो तो एक तो ईन्धन का दुरुपयोग कर रहे पर्यावरण को भी नुकसान पहुचा रहे हो और खुद थोडा चलकर जाओगे तो कसरत भी हो जायेगी साथ मे शारीरिक तौर पर भी स्वस्थ । मतलव एक काम फायदे दो । वहीं पौधों पर अनचाहा कीटनाशक स्प्रे भी वायु को जहरीला वनाता है प्लास्टिक का जिकर दुवारा कर रहा हुं कयोंकि ये शव्द ही एसा है जहा भी प्रदुषण की वात आयेगी पौलोथीन प्लास्टिक  प्रथम श्रेणी मे आयेगा ही आयेगा तो जव भी प्लास्टिक जलता है ये वायु को वहुत नुकसान पहुचाता है ईससे जलकर जो गैस वनती है वो स्वास्थ्य  के लिये नुकसान देय है और कयी तरह की वीमारीयों को जनम देता है
ध्वनी प्रदुषण मे तो अनचाहा शोर चाहे वो कारखानों मे चलने वाली मशीनो का शोर या फिर आपकी गाडीयों की वेमतलव टी टैं सव ध्वनी प्रदुषण को जन्म देते हैं अव ईसमे कोई रौकेट साईस तो चाहिये नहीं ईस्के उपर लगाम लगाने को आप हम सव मिलकर रोक सकते हैं और रोकना ही होगा
हमारे वेद पुराण मे भी पर्यावरण का कई जगह जिक्र किया है वा प्रकृति को देवी समान माना गया है तो हम जो कर रहे कया वो प्रकृति का अपमान नहीं ?
घोर अपमान है
कव तक वच्चे ही जगाते  रहेगे कया हमारी समाज के प्रति पर्यावरण के प्रति कोई जिम्मेदारी नही वनती
पर्यावरण  के लिये सवसे वडा खतरा है ईन्सान जी हां कटु है लेकिन सौ टका सत्य अव देख लो घर वनाना लो जी काट दो पेड टक टक करती वडी वडी मशीने खोखले कर दिये पहाड , कैमीकल ईस्तेमाल करके उडेल दिये नालीयों मे वहा दिये नालों मे , अव भला प्रकृति को मानव से खतरा नहीं तो किससे है जंगली जानवरों से ,ना ना वो तो वेचारे खुद परेशान है जंगल तवाह करके उनके खुद के घरों को उजाड दिया है , अव वस करो मानव ईस विकास के अन्धे वुलडोजर को रोक दो कही देर से ये विकास विनास ना वन जाये

हमारे वेदों में एक उक्ति लिखी गयी है'-"िक्षति,जल,पावक,गगन,समीरा,पंच रचित यह अधम शरीरा"
इसका आशय यह है कि मानव के शारीर की रचना पांच तत्वों पृथ्वी,जल ,वायु,अग्नि और आकाश से मिलकर हुआ है| ये पांचो तत्व प्रक्रति के अहम हिस्से है |
...........................अत: मानव जीवन मिलने बाद हमें इस पर्यावरण के अंश को बर्बाद नही करना है उनका रक्षा करना है नहीं तो मानव का अस्तित्व है नहीं रहेगा ...........................विश्व पर्यावरण दिवस पर पेड़ जरूर लगाये
#अंकुश्ठाकुर

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