मजदूर दिवस
भारत में वैसे वहुत से दिवस का ट्रैन्ड हो गया है जिसमे प्रेम दिवस और प्रेम के साथ साथ प्रेम के वाद आने वाले सारे दिवस होते है सवको प्रसन्नता से मनाया जाता है आज मजदुर दिवस पर कोई अपनी मजदुरी मार कर ईसे मनाना पसन्द नहीं करेगा जाहिर है पेट का सवाल है और पेट से समझौता कर भी ले मगर घर वार वच्चों के जव वलैन्कड वहाईट तस्विरे ंसामने आती और कान मे गुंज सुनायी देती अजि सुनते हो चावल भी खतम हो गये ? है तो यकिन मानीये धक धक करने वाला ये नैचुरल यन्त्र जिसको डाक्टर लोग हार्ट कहते हैं वोल उठता है भाई उठा अपना झोला और शुरु कर रोजी । लेकिन दुसरी ओर टेडा सा मुंह करके सोच रहा हुं सही भी किया सभी डिपार्टमैन्ट के दिन रख दिये तो ये भला ईसे कयों छोड दिया जाये आखिर हम सव भी तो मजदुर और मजवुर ही तो हैं ।कयी ए सी मे वैठने वाले मजवुर तो कयी कडकती धुप मे मेहनत करने वाले मजदुर ।आज हम उस एन्ड्राइड दौर मे जी रहे हैं जिसमे सभि व्हाईट कालर वाली नौकरी करना तो पसंद करते है पर पसीना वहाना कतयी नहीं चाहते ं ।
यदपि हम भारतीय परम्परा मे विशवक्रमा डे मनाते हैं जिस दिन सभी अपने हथियार डाल देते हैं और ककुछ श्ण का व्रेक लेते हैं ये तो कार्ल माकर्स साहव ने डैडीकेट कर दिया हम सव के लिये श्रम दिवस मजदुर दिवस
वास्तव मे शरीर से किये गये श्रम को कभि छोटा या वडा नहीं समझना चाहिये और हर श्रम व श्रमिक को सम्मान देना चाहिय । खैर अव अच्छे दिल वालों की तरह हैप्पी मजदूर दिवस वोलो।आपकी कसम मैने तो विस किया एन्ड पलिज रिसपैक्ट माय ईमोसन्स
और हां वौस को वोल देना आज हमारा दिन है
कयोंकि हम सव श्रमिक हैं
जय हो
‪#‎अंकुशठाकुर‬

©2015 
AnkushThakur045.blogspot.com

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