वचपन मे मासूमों के खिलाफ ईस्तेमाल होने वाला यह एक एसा अस्त्र है
जिसका सामना तकरीबन सवने किया ही होगा ,और जिसने नही किया
वो किस्मत वाला है कि दर्द भरे दो आंसू आंख से वेवजह नही निकाले ,
खैर स्कूल के दिन थे दूसरी तीसरी मे होगे ,वचपना परवान पर था , हम
मस्त मलंग टिफिन मे रखे अचार की खूबवू को महसूस कर रहे थे ,
ईंतजार मे थे की कव आधी छुट्टी की घंटी वजे और हम सवसे पहले वस्ते
मे रखे ईस अतिरिक्त भार को कम करें , समय एसा लग रहा था कि रुक
सा गया है घड़ी की सूईयां मानो थम सी गयी है , मुझसे और ईंतजार
नही हो रहा था झट से मैने एक हाथ वस्ते मे डाल कर अचार का एक
टुकडा निकाल लिया और ईसे गुपचुप खाने लगा , हमारे हिमाचल मे खट्टे
और आम का अचार हर घर मे आसानी से मिल जाता है और जो भी
खाता है वस वो ईसका दीवाना हो जाता है , साथ ही वैठा मेरा दोस्त उस
अचार की खूसवू को समझ चुका था उसे भी अव भूख लगनी शुरु हो चुकी
थी , तीसरा हमारा साथी मैडम से पीटायी खा रहा था और उसके
एक्सप्रेशन देख कर हमारी हंसी अनकन्ट्रोल सी हो रही थी जितनी मार
नही खा रहा था उतना एक्टींग कर रहा था ,मतलव राजपाल यादव को
भी फेल कर रहा था , हमारे लिये उसकी पिटायी एक मौका था अपनी
भूख को चुपके से कन्ट्रोल लेवल तक लाने की , तभी एकदम अफरा
तफरी मच गयी , हर जगह हाय तौवा , सवके चमकते चेहरे मधम से पड
गये , पर ईन सवमे हमारा राजपाल यादव विल्कुल सामान्य था शायद
मार खा खा कर डीठ हो गया हो
,हमने देखा एक वैन मे कुछ सफेद कोट पहने औरते और दो मर्द
हमारी ओर एक वाक्स् सा लेकर वड रहे थे ,
मैडम अव क्लास से जा चुकी थी , हमे वताया गया कि आज हमारा
टीकाकरण होना है मै मेरे दोस्त के चेहरे की तरफ देख रहा और वो मेरे ,
लडकियों का चेहरा तो शिमला मिर्च सा वन गया था , सवका नंवर लगा
कर सवको लाईन मे विठा दिया , सामने से रोने विलखने की आवाज
हमारे मन को गव्वर की तरह डरा रही थी अरे वही गव्वर शोले वाला यार ,
मै चुपके से सवके एक्सप्रेसन देख रहा था सवकी आंखे व्यास नदि जैसी
वहे जा रही थी ईसमे मैने देखा की व्यास के साथ साथ नाक से नाले (चो)
भी वहने शुरु हो गये थे , अव तक मेरे तोते उड चुके थे , उनको रोते देख
कुछ विना ईंजैक्सन लगाये रोना शुरु कर दिया , अव मै दुविधा मे पड
गया कि रोउ की ईनको देख के हंसू , धीरे धीरे लाईन खत्म होती गयी
और हमारे नन्हे से दिल की धडकन तेज होने शुरु हो गयी , लंगडाते आते
वच्चों को देख कर मेरा दोस्त वोला चल भाग जाते है ,मै विल्कुल तैयार
था कि एन मौके पर मैडम ने दवोच लिया और डाक्टर के पास ले जाकर
वोली ईनको दो ईंजैक्सन ज्यादा लगाना सवते गाजले हान , फिर कया
पाउडर लगाकर गोरा किया थोवडा एकदम पीला सा पड गया , दो नर्स ने
पकडकर हमारी तसरीफ मे जो टीके जडे जो टीका जडा ,....हाय रव्वा
पूछो मत , हम दोनो दोस्तो को सामने टेवल पर लेटाया था दोस्त को
टीका लगाया तो चिल्लाया ,"उयी मम्मी ,मारी तेया ओ ,मम्मी नो ॥ अव
मुझे भी ईंजैक्सन लगा दिया पर मै हंस भी रहा था और रो भी ,हंस दोस्त
को देख के और रो टीके के दर्द के कारण लंगडाते हुये मैडम की तरफ
गुस्से से देखकर चले गये , अव समस्या तव खडी हुयी जव अगले दिन
चला भी नही गया , हम सव विकटीम वच्चे लंगडाकर चल रहे थे , भाई
साहव तसरीफ का जो हाल उन डाक्टर ने किया था कि पूछो मत , तीन
दिन तक हमारी व्यास और कुनाह वहती रही थी , ईस टैटनस के टिके ने
तो जान ही निकाल दी थी ॥ दुवारा ईस टीके का नाम सुनकर होश उड
जाते है और यह सीन याद आ जाता है
#टीका_ए_टैटनस्
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