" teenage"
हमीरपुर के गांधी चौक से उतरते ही ना जाने कयों मोमोज की दीवानगी उसमे उठ गयी , एक तो अंग्रेजी मिडीयम की कटरमकटर उपर से हम सरकारी प्रोडक्ट जो अक्सर साईन थीटा और कोस थीटा मे जिंदगी से ज्यादा उलझे रहते थे , मैथेमैटिक्स का हिसाव तो सर् से उपर जाता ही था लेकीन एक और हिसाव था जो मैथ्स से भी वाउंस कर रहा था , "ईश्क " का हिसाव .ये एसा हिसाव था जिसे ना वो दे पा रहे थे ना हम ले पा रहे थे , मोमोज वाली आंटी के पास प्यार भरे नग्मे लगाकर पूरा माहौल हम जैसे ही प्रेमियो के लिये सजा था , ओपन माईंडड भीड़ मे खुद को देखकर मैने उससे थोडी दूरी वना ली ,पर वो भी हिसाव मे डफर मुझ जैसे सरकारी स्कूल के लडके को ईंटैलिजैंट किस्म का हायव्रिड वनाना चाहती थी शायद तभी हाथ पकड कर वोली ,कम औन जस्ट चिल् , यह मेरा फेवरिट प्लेस है ,यह चिल मेरे लिये रैड चिली से कम नही था जो रंग विरंगे फटी जीन वाली भीड मे कोकाकोला पीकर आये डकार के जैसे था , चाउमिन वाली आंटी शायद हम जैसो कितनो के साथ फैमिलीयर थी उसे पूरा मालूम था कि चाउमिन के साथ कौन सा गीत सुनना ये लोग पसंद करते हैं , कान मे कहने लगी कैसी लगी , मैने पूछा कौन चाउमिन वाली आंटी या यह जगह ,( वैसे जगह भी अच्छी है )
गुस्से से वोली चाउमिन पर तुम वस चुप रहो , ......
Haha haha
सूचना :-ईस रचना के सारे पात्र काल्पनिक हैं जिनका कहीे ना कहीं किसी प्रेमी - प्रेमिका से किसी ना किसी वक्त मे खासा सम्वंध रहा है । ?
#अंकुशठाकुर
Comments
Post a Comment