फीकी सी हो गयी है होली ,
उस दौर मे रंग विरंगे चेहरों के फोटो नही लिया करते थे पर ईस रंग विरंगे त्योहार को दिल मे जरुर वसा लिया करते थे ,
सवसे पहले गांव मे तायी चाची को रंग लगाने की होड रहती थी और अपनी अपनी अम्मी को वचाने की पूरी नसीहत भी दे दी जाती थी , यह पूरी जानकारी वकायदा समझाई जाती थी कि ताई या चाची ईस तरफ से हमला करने वाली है तो अलर्ट रहें वाद मे हमे परेशानी हो जाती थी कि कौन सी म्हारी जन्मदाती है कौन सी म्हारी चाची है , हा हा मुंह ही एसा वना देते थे और कुछ एसी शतिर होती थी कि गोवर का वो हरा रंग होता है ना अरे वहि पांच रुपये की पुडिया वाला साला एक वार लगा दिया तो वासस् , वो वाला रंग एसा रगड़ रगड़ के थोपती थी कि अगले एक महीने तक ताउ और चाचु पहचान नही पाता कि यह है तो मेरे वाली हि कि कोई और , और हरे रंग पे जो काली आंखे चमकती ना हाहा वडका जी कति हार्ट अटैक वाली सिचुएशन वन जाती थी खैर
जो पूरा साल शरीफ सी कमजोर सी वनकर रहती थी ना जाने ईस दिन कहां से ताकत लेतर आ जाती थी हमे भी एसे पकड़ती थी कि कुछ क्षणों मे एसे फील होता जैसे ताडकां ने श्रीराम को पकड लिया हो ॥
लेकिन एक वात थी हम किसी अनजान लडकी को झेडने की मंशा से रंग नही लगाते थे ईवन किसी भी मंसा से लगाते ही नही थे , हमे पता था अगर रंग गल्ति से किसी लडकी को लगा दिया तो घरवालों की कुटाई से पडने वाले रंग कई दिनो तक दर्द देते रहेंगे ,
और वहनो से तो पूरे साल का हिसाव हम रंग लगा लगाकर वरावर कर देते थे , लेकिन अव ये होली फीकी सी पड गयी है , कुछ सैल्फियां लेने के लिये रंग लगा देते है तो कुछ फारमैल्टी पूरी करने के लिये , पर एक वात है सैल्फीयों ने भी थोडा प्रोत्साहन दे दिया है लोगो को , होली सवसे ज्यादा उत्तर प्रदेश मे मनायी जाती है फिर हरियाणा राजास्थान विहार दिल्ली और वाकी नौर्थ के राज्य शामिल हैं ॥
ये पोस्ट कल आने वाली थी पर टैक्नीकल फाल्ट के कारण आज पोस्ट हो रही है
‪#‎अंकुशठाकुर‬


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