#गुफ्तगूं #अंकुशठाकुर
सुनो !!!
हां वोलो , तुम ना शहर की भागम दौड मे कही ईतना दूर ना चले जाना कि पहाड का सफर फिर लम्वा लगने लगे ...
एक वात वोलूं .........!!!
जिसने पहाड से शहर का लम्वा सफर तय कर लिया हो उसे शहर से पहाड का सफर करने मे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा , दूरियां नही किसी के साथ दिल की गहराईयो की अटैजमैंट मैटर करती है डियर् ॥
वस् वस् अपनी यह फिलौसपी ना झाडो ॥
(आजा दिखी लै दिल्ली दिये गोरिये हुस्न पहाडां दा )
#अंकुशठाकुर
ankush.thakur045@gmail.com

Comments

Popular posts from this blog