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ये  हसीं  baadiaa    कुछ  बता  रही  हैं ये  पंछियो  की  चीन -चीन  कुछ  सुना  रही  है ..... स्नोफॉल  हुआ  शिमला  में  और  शरद  हवा  हमीरपुर  में  आ  रही  है ..... क्या  बताऊ  दोस्तों  शर्दी  बहुत  सत्ता  रही  है ..जायदा  मत  मुस्कराओ  ये  तो  रजाई  की  याद  दिला  रही  है ....... ©2013 By:-अंकुश  ठाकुर .....
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रिजर्व वैंक से मांगा जवाव... दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय मुद्रा पर श्री वैष्णों देवी के चित्र पर रिजर्व वैंक से जवाव मांगा है और पुछा है कि क्यों सिक्कों पर हिन्दु देवी देवताओ के चित्र छापे गये हैं..दरअस्ल एक मुस्लिम समुदाये के वयक्ति ने ये याचिका दाखिल की थी... मुझे समझ नहीं आ रहा की भारत जैसे देश में छाप दी तो कोई गुनाह कर दिया कया..आखीर भारत में ना छपेगी तो कया नाईजिरीया दुवई या पाकिस्तान मे छपेगी... शायद कुछ मित्र अव सेकुलर वातें करके वोलेंगे की ऐसा वैसा..कयों.वगैरह वगैरह. . तो अगर छाप दी तो उस व्यक्ति विशेष को ऐसी कया मिर्च लग गयी की जले जले जाकर कोर्ट पहुंच गया.... वात हिन्दु मुस्लिम की नही है वात है चिजों को समझने और सवीकार करने की..ईतनी ईतनी वातों में ईनको एसा कयों लग जाता की ईनका धर्म ईससे कमजोर पड जायेगा..कया ईतना ही कमजोर है ईस्लाम..नहीं ना..? फिर कयों.. वहुत और मुद्दे हैं देश में उनके लिये लडो.. In ThE PeN oF  ‪#‎ अंकुशठाकुर‬
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‪#‎ HinduMandir‬   ‪#‎ Mumbai‬   ‪#‎ MumbaDevi‬   ‪#‎ ankushThakur‬ मुम्वई में एक वहुत प्रसिद्ध मंदिर है नाम है मुम्वा देवी जिसके नाम पर मुम्वई का नाम पडा, ये समुद्री कामकाज वाले और मच्छी वयवसाय वालों की कुल देवी थी.. जव जव मैं वहां गया मुझे सवसे शरमिंदगी और दु:ख का एहसास हुआ कुछ तिलक धारी हाथ में डोरीयां लेके मंदिर के आंगन में धुमते रहते और लोगों को तिलक लगाने के लिये पकडते रहते जव कोई धार्मिक पृवति वाले तिलक लगवा लेते या हाथ में डोरी वंधवा लेते तो 50 और 100 रु की मांग करने लगते और डर ाने धमकाने लगते ये सव मंदिर न्यास पुलिस के सामने होता.. जव ये सव मंजर मैने पहली वार देखा तो हैरान रह गया की लोगों को किस तरह लुटा जा रहा जलील किया जा रहा.. मैने ईसी के संतर्भ में वहां पर काम कर रहे लोगों को सुचित किया लेकिन उन्होंने भी कहा कि एक दिन हम रोकते अगले दिन फिर से वही शुरु हो जाता... तो विश्व हिन्दु परिषद वजरंग दल और शिवसैनिकों से आग्रह करुंगा कि ईस तरह के मुद्दों को भी ध्यान में लें..ताकि हिन्दु धर्म का मजाक ना वनता रहे. अगर मैं गलत हुं तो कृपा आप वहां जाके देख सकते हैं अभी भी...
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हर गली में शोर है सवका अपना जोर है नया साल मनाने का दिवानों में होड है.. जाम पर जाम छलक रहे हैं, मयखाने दिवानों से महक रहे हैं.. साकी ने भी जाम चढाया है... मयखानों को तभी खास सजाया है... आज तो महफिल है दिवानों की,आज ही तो कईयों ने ये मौका पाया है.... कुछ मदिरा का शरुर चढा वैठे हैं, उतार कर कुछ, फिर चढाने को वेचैन वैठे हैं.... कुछ चहकते हुये तो कुछ वहकते हुये वैठे हैं.... मदिरा से दुर रहते हैं ऐसा कहके हम वैठे हैं..... ‪#‎ अंकुशठाकुर‬ ©2015 ankushthakur
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  # अंकुशठाकुर‬ हिमाचली पहाडी वोली के लोगों के लिये जरुर पढें :- टोलदे रही जाणा.... ‪#‎Himachal‬ ‪#‎Hamirpur‬ खेतरां च हाली..खुआं रा ठण्डा पाणी.. टोलदे रही जाणा......!!!!!! सरों दा साग टवरां दा प्यार घरां च लस्सी , कपडे टंगणे दी रस्सी आग चुल्हे दी पालकी दुल्हे दी टोलदे रही जाणा...................... सै पुराणे नोट ओ वावे दे रोट कूंडा आली लाडी, गांवा च दाई दुधा उपर मलाई,ओ पुराणे हलवाई.. टोलदे रही जाणा...................................... वासी रोटीया पर अचार सै रस्तेयां घुमदे लुहार.. कांसे दी थाली, डंगरा दी पाली वजुरगां दी आन सै कठेयां करेयां दी शान खेतरां च धान , जेडे कच्चे मक्कान.. टोलदे रही जाणा..................................... वांई पर नाहणा, पतलां मे खाणा पुरानी स्याला री ठण्ड कन्नै घा रीयां पाण्ड टोलदे रही जाणा.... ओ पुराणी नाथ सै जनानां रे गीतां दी पाख... एंकलियां दिआलीयां दी वेढियां कचैलुआं री... टोलदे रही जाणा............ आगे भी जोड कर पुरा कर सकते हो.... #अंकुशठाकुर 2:34 nov 2014 ©2014-2015  ankush thakur
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dedicate to kanwar vinod sir g and all seafarer.... ©2014 anush thakur special thank to kanwar vinod guru g मैं नाविक हुं दरिया मेरी मंजिल है.. लहरों से टकराता हुं पर वार वार खुद को अजमाता हुं.. मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं... सागर के गर्भ में उगती और डुवती सुर्य की रोशनी का मेहमान हुं.... www.facebook.comshanAHimachal कभी समुद्री तुफान हुं तो कभी नीला आसमान हु...... कभी जहाज की शान हुं कभी दरिया मे वीती शाम हुं...... कभी छलके पैमाने का जाम हु  कभी वहके दिवाने सा नादान हुं मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं कभी अपने सपनों का नवाव हुं तो कभी धरा की गलियों में गुमनाम हुं.... कभी अडीग चट्टान हुं तो कभी किनारे पर गिली मिट्टी में लिखा नाम हुं कभी अपनों का प्यार हुं तो कभी उनका किया ईन्तजार हुं... मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं........... .............. .. . .. ©2014DEC ANKUSH THAKUR
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हिमाचल के ईतिहास और राजाओ के किले की दुर्दशा पर कुछ पहाडी में लिखा है आशा करुंगा आपको पसंद आयेगा.एक वार जरुर पढें:- कांगडे दे राजेयां दी कहाणी,नुरपुरे सुजानपुरे दे किलेयां दी नशाणी.. ओ राजा ते ओ राणी.... ना कुनि दिखी ना कुनि जाणी..... राज छुटि गये महल टुटी गये.. खण्डहर वचि गये आदमी मुकी गये.. विच चवारे च रुख कुछ हरे हान ते कुछ सुकी गये.. ना जाणे सै आदमी कुती लुकी गये सरकारां चलदी गईंया,अनदेखा करदी गईंया... महल भतेरे पर जाणदा सिर्फ तेरे कन्नै वरगे मेरे... वावु मस्त ए,काम सुस्त ए..फाईलां च साव कुछ वडा ही जवरदस्त ए... गलां ईना दा मुन्जो दुख है ते तिजो दुख है.. पर जेडे काम करणे आले ओ ता काम ते ही विमुख है ... ए ता साडा ईतिहास है,सवदे वास्ते वडा खास है... ए कोई मजाक नी, ना छोटी वात है ए हिमाचले रा ईतिहास है...... ए हिमाचले रा ईतिहास है..... ए थी पहांडां रे राजेयां दी कहाणी, सै हाली भी काट ही जाणी....... पर हुण असां सारेयां सामणेया ए लियाणी.... ............................जय हो................................. #अंकुशठाकुर