dedicate to kanwar vinod sir g and all seafarer....
©2014 anush thakur
special thank to kanwar vinod guru g

मैं नाविक हुं दरिया मेरी मंजिल है..

लहरों से टकराता हुं पर वार वार खुद को अजमाता हुं..

मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं...

सागर के गर्भ में उगती और डुवती सुर्य की रोशनी का मेहमान हुं....www.facebook.comshanAHimachal

कभी समुद्री तुफान हुं तो कभी नीला आसमान हु......

कभी जहाज की शान हुं कभी दरिया मे वीती शाम हुं......

कभी छलके पैमाने का जाम हु 

कभी वहके दिवाने सा नादान हुं

मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं

कभी अपने सपनों का नवाव हुं तो कभी धरा की गलियों में गुमनाम हुं....

कभी अडीग चट्टान हुं तो कभी किनारे पर गिली मिट्टी में लिखा नाम हुं

कभी अपनों का प्यार हुं तो कभी उनका किया ईन्तजार हुं...

मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं

मैं नाविक हुं वुलंद हौंसलों की खान हुं..............................

©2014DEC ANKUSH THAKUR

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