#आशिकी_शाम #अंकुशठाकुर

सर्दी के उस मौसम मे पढाई की मार और वचपन का प्यार , हाथो मे एक पोथी पकड कर सुवह शाम गुरु जी के लैक्चर का जवरदस्ती रिपीट टैलीकास्ट टियुसन वाले भाई के पास हो रहा था ,
उसके हुस्न के चर्चे तो पहले ही सुन लिये थे पर उसके दिदार को आंखे वेचैन थी , गार्डन मे लगे पिंक रोज को तोडना तो नही चाहता था पर यु ही ना जाने कयों तोड देता है,
ये कया सामने से लगा एकदम मौसम ने करवट ले ली है सर्दी का मौसम वदल रहा था मुह से कुछ नही निकल रहा था , वो पिंक रोज भी ना जाने कयों मुझे ललकार रहा था , मै डर सा गया एकदम रफ कापी के उस पन्ने पर जहां वैन्जीन के चेन रिएक्शन वनाये थे उसमे एडजस्ट कर देता हुं , आंधी की तरह वो सामने आ रही थी कुछ देर के लिये लगा वस् अव उडने वाले है और ईससे ज्यादा और कया चाहिये उसके साथ उडने का मौका मिल रहा हो , खैर नजदीक पहुंच कर जव उसकी आंखों मे देखा तो सिवाय कजरा महोवत वाला अंखियो मे एसा डाला ,कजरे ने ले ली मेरी जान के सिवाय कुछ फिल नही हो रहा था ईमोस्नस वट्स एप वाले सटीकर की तरह जीभ निकाले एक आंख वंद कर हंस रहा था तभी उसने भी जैकलीन स्टाईल मे पुछा हाउस यु , और यहां आई कैन स्पीक ईन ईंगसीस , टाक ईन ईंगलिस , वाक ईन ईंगलिस कहने वाला मै मानो चकरा गया , कुछ वोला ही नही जा रहा था हैंजी ठीक हु वडी मुस्किल से जोर लगाकर निकले , फिर तो रोज दिन काटना मुस्किल होता था कवि शाम हो कव उसका दीदार हो करवाचौथ के चांद से कम थोडी थी वो , खैर करवाचौथ भी वही थी और चांद भी वही
दिन गुजरते गये अरमान हमारे भी दवे रहे ,
कव स्कुलिंग हो गयी कव उससे दुर हो गये पता ही नही चला पर आज भी उस जगह से गुजरता हु जहा पहली वार तुमने मुझे हाउस यु वोला था सच मे किताव मे दवा वो पिंक रोज फिरसे मुझे छेड़ने लग जाता है , और तुम्हारा वो फोटो आज भी मेरे मोवाईल मे सेव है जिसमे तुम्हारी वो प्रिती जींटा वाली स्माईल हर वार मुझे आत्ममंथन करने पर मजवुर कर देती है ,
प्यार कया है हमने तो आज तक जाना ही नही वस तुम्हे देखा था कुछ महसुस किया था , लगा था कि समथिंग एग्जिट ईन दिस युनिवर्स वस् वो लम्हा हर वार याद करके जीते है कयोकि जानता हु रांझु की फुलमु कभी जीते जी हो नही सकती

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