खुशियों का मेरे से नाता नहीं ॥
गम मेरे पास से जाता नहीं
अकसर तनहाईयों ने साथ निभाया है
लोग कहते है अंकुश तु तो bda talanted है पर ये लिखने का talent तो वकत ने सिखाया है ॥ ईस वकत कि सिख को कया कहूं ना जि सकुं ना मर सकुं..............
ना हस सकुं ना रो सकुं ............
ना घावों को पोछ सकुं ना ईन वहते अशरुओं को रोक सकुं.............
ये आंसु आंख से जाता नहीं कयोंकि अपना तो खुसियों से नाते नहिं...............

©2015
!by:-अंकुश ठाकुर....

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