नमस्कार , दलित VS politics , आजकल यही शब्द ट्रैंड कर रहे हैं , जैसे ही उतर भारत मे चुनाव आने लगते है यह शव्द सुनना और पढना आम हो जाते हैं , कुछ एक तवका जो खुद को दलितो का मसिहा समझता है ईस समय एक्टिव मोड मे औन हो जाता है पर असल मे वो सिर्फ वोट राजनिति तक सीमित रहता है , हिन्दुस्तान मे वैसे तो कयी वैंक है मुझे सवका नाम याद भी नहीं पर यहां ईंसानो की भावनाओ का ,जात के नाम पर स्वार्थ साधने का एक खास वैंक है जिसे हमारे वुद्धिजीवी और नेतागण वोट वैंक कहते हैं , ईस वैंक का दुर्भाग्य कहे या ईस वैंक मे अपनी वोट नामक पूंजी को अपने उज्जवल भविष्य का सपना देखने वालो का अभाग्य ईसमे वोट द्वारा दी गयी पूंजी ईन्वैस्ट तो होती है पर वो ना तो वापिस मिलती है और ना ही ईस पर उनको कोई व्याज मिलता है , हां उन अभाग्य श्रेणी के भारतीयो को देखने के लिये मूर्त्तियां वेशक मिल जाती है , पर अगर मूर्तियां देख कर पेट भरता हो तो वेशक देखनी चाहिये और तव तक देखते रहना चाहिये जव तक पेट भरे ना , खैर ईनको दलितो की याद तभी आती जव चुनाव होते है दलित शव्द पर विहार ,उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश और झारखंड मे ज्यादा राजनीति होती है ,खुदको दलितो के मसिहा कहने वाले आज BMW , Fortuna जैसी महंगी गाडियों मे घूमते हैं करोडो के वंगलो मे रहते हैं कया आजतक किसी नागरिक ने पूछा यह कौन सी देवी की पूजा करते है जो हमारे नाम पर वोट मांगकर करोडपति वन गये है कौन से ऐसे वैंक मे पूंजी ईन्वैस्ट करते है जो हजारपती से सीधे करोडपती और अरवपति वन जाते हैं , मांगिये जवाव !!! हमारे संविधान ने भारतवर्ष के हर नागरिक को समान अधिकार दिये गये है और यह स्वतंत्र भारत है जो लोकतंत्र और संविधान मे लिखित कानून से चलता है ईसका जो अपमान करेगा अवहेलना करेगा उसे कानून के तहत दंडित किया जायेगा लेकिन नेताओं ने नागरिको मे भी कुछ खास को अलग करके अपना मकसद सीधा करने के लिये छांट लिया है उत्तर प्रदेश और विहार राज्य ईसका जीता जागता उदाहरण है यहां यादव सिर्फ यादव को वोट देता है ,व्राहम्ण सिर्फ व्राहम्ण को ठाकुर सिर्फ ठाकुर को पासवान सिर्फ पासवान को और हरिजन सिर्फ हरिजन को कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम 21वी सदी के भारत की वात करते है जहां तरक्की की मिशालें पेश होती आ रही है चांद मंगल पर रौकेट दाग चुके हैं पर जात पर अभि भी वंटे हुये हैं और यही एक कारण भी है कि UP Bihar के नेताओ की सत्ता मे ईतनी भागीदारी होने के वावजूद विकास मे भारत के किसी भी दूसरे राज्य से ईन दो राज्य की तुलना भी नही की जा सकती , कया कभी ईन राज्यो मे रहने वाले लोगो ने कभी जात के उपर सोचा ? या सिर्फ नाम के पिछे लगे किसी ठाकुर के नाम पर थप्पा थोप दिया , काम देखकर वोट डाले होते तो आज यूं , यूपी विहार के ईतने गांव स्वतंत्रता के ईतने वर्ष वाद भी विजली से अछुते नही रहते , कयोकि आपको मूछ को ताव देना है भले ही घर मे विजली और गांव मे सडक ना हो तो दे लिजीयेगा ताव कया जाता है आपकी जात का विधायक जो वना है ,जात नाम का यह वायरस यूपी विहार मे वहुत फैला हुआ है , अभि यूपी चुनाव है तो समाचार पत्रो मे दलित VS politics छापी जायेगी कयी मुद्दे सैल्फ क्रियेट किये जायेगे तो कयी मुद्दों को जवरन तुल दिया जायेगा विहार मे सवने देखा अव यूपी चुनाव आ रहे है आदल डाल लिजीयेगा कयोकि यह वहुत कौमन है और वहुतो का रोजगार भी ,ईस गेम मे कही TRPका खेल होगा तो कही politics का गेम , देखना कोई दिलचस्प नही है वैंक पहले से फिक्स है वस अव ईस शव्द को गेद वनाकर उछालना है और ईतने दूर (कर्नाटक ) से लेकर ईतने उपर तक ,कि ताकी आसानी से गोल हो जाये "कुर्सी का" ।
नोट - कोई किसी भी नागरिक से दुराचार दुर्व्यवहार करे तो तुरंत कानूनी सहायता ले और अपराधीयो को सवक सिखाये एक्सन किसी की जात धर्म पूछ कर ना लें , और हां न्युज रुम मे सक्रिप्ट तैयार है दलित VS other का मसाला लेकर कयी तैयार वैठे है ये आम वात है ,ध्यान मत दिजीयेगा नही तो आप भी ईनके झांसे मे फंस जायेगे और मूछों को ताव देकर तैयार हो जायेगे , फिर खेलते रह जाओगे ठाकुर to thakur and paswan to paswan ...be aware
#अंकुशठाकुर #UP_Politics_India
ankushthakur045.blogspot.com
ankush.thakur045@gmail.com
Comments
Post a Comment