"जव हरे हरे नोट वरसे तो गांव के चुल्हे जलने के लिये तरसे " हरे लाल नोटों नें वन्द कर दिये थे गांव के चुल्हे.... आप विल्कुल सही पढ रहे हैं ये वात है भारत के एक ऐसी जगह कि जिसने आज पुरे भारत में अपनी अलग पहचान वनायी है और आटोमोवाईल से लेकर तमाम तरह के उद्दोगों को जगह दी, लेकिन किस तरह का रहा मंजर था जव यही जगह सुनसान होती थी विरान होती थी और गांव के एक कोने में खेती या विरान पडी थी, ईसी वात का उतर मुझे मिल गया जव ईसी जगह से सम्वन्ध रखने वाला गौरव यादव मुझे मिल गया ये सव मुझे तो सपना ही लगता था करोर अरव लेकिन जव करोर वाले लोग मिले तो उत्सुक भी था जानने का कि एक साधारण से परिवार से जव करोरपति वने तो कैसा वदलाव आ गया , ये वात है गुडगांव के साथ सटे माणेसर कि और आज गुडगांव की चकाचौंध किससे वेखवर है,, मैं हिमाचल से सम्वन्ध रखता हुं और यहां ज्यादातर लोग सामान्य वर्ग के होते हैं और माणेसर की वातें जव जहन में घुम रही थी तो प्रशन पे प्रशन भी उठ रहे थे मानो प्रशन का एक सलाव सा दिमाग में घुम रहा था और मैं एकदम से सव जवाव जानने के लिये वेचैन , पर धीरे धीरे जव वाते सा...